शिक्षा को आजीविका का साधन समझकर पढ़ना नीच-वृत्ति कहा जाता है, आजीविका
का साधन तो शरीर है . पाठशाला तो चरित्र गठन का स्थान है. विद्यार्थियों को
यह पहले से ही जान लेना जरूरी है कि हमें अपनी आजीविका को बाहुबल से
प्राप्त करना है.
- नमालूम
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