Saturday, December 27, 2014

लोकतंत्र के पहरेदारो

चूल्हे बांटे , चौके बांटे , बांटा खेत मकान को
लोकतंत्र के पहरेदारो , मत बांटो इंसान को

- नमालूम

हमने आँखों में

हमने आँखों में अपने आंसुओं को पाला है
हर एक ग़म को हमने मसर्रत से पाला है

- नमालूम

रंग चेहरे के उतर जायेंगे

रंग चेहरे के उतर जायेंगे , बंद कमरों में सिमट जायेंगे
जुल्म तो रेत के घरोंदे हैं , एक ठोकर में बिखर जायेंगे

- नमालूम

बरसातों के गहरे जल का

बरसातों  के गहरे जल का , ताल निखरता जाए
रफ्ता-रफ्ता धुंधला चेहरा, साफ़ झलकता जाए

- नमालूम

वो अफसाना

वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ देना ही अच्छा

- नमालूम

वो मेरा रौनके महफ़िल कहाँ है

वो मेरा रौनके महफ़िल कहाँ है , मेरा बिजली मेरा हासिल कहाँ है
मुकाम उसका है इन दिल की खल्वतों में , ख़ुदा जाने मुकामे दिल कहाँ है

- नमालूम

बहुत हसीं हैं सोहबतें

बहुत हसीं हैं सोहबतें गुलों की मगर
ज़िन्दगी वो है जो काँटों के दरमियाँ गुज़रे

- नमालूम

मेरे आंसुओं को या रब

मेरे आंसुओं को या रब है तलाश आज किसकी
किसे ढूँढने चले हैं , मेरी आँखों से निकल-निकल कर

- नमालूम

छुपायी चोट उल्फत की

छुपायी चोट उल्फत की बहुत, पर क्या करें इसको
जिगर के चन्द टुकड़े आंसुओं में आ गिरे

- नमालूम

तसव्वुरे जानां किये हुए

दिल ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन
बैठे रहे तसव्वुरे जानां किये हुए

- गुलज़ार 

जुस्तुजू है

जुस्तुजू है खुद के दीदार की
पर रूबरू आईना नहीं मिलता

- नमालूम

मरने के बाद भी

मरने के बाद भी मेरी आँखें खुली रहीं
आदत पड़ी थी जिन्हें जो इंतज़ार की

- नमालूम

ऐ ! बादल जरा थम के बरस

ऐ ! बादल जरा थम के बरस , कि कहीं वो आ न पायें
उसके बाद फिर जम के बरस , इतना बरस कि वो जा न पायें

- नमालूम

जिस दिल को हुआ न

जिस दिल को हुआ न दर्द कभी , वह दर्द की हालत क्या जाने
अपने को खबर उनकी ही नहीं , वह गैर की हालत क्या जाने

- नमालूम

जो सच पूछो

जो सच पूछो तो शायद अपने किए कुछ नहीं होता
ख़ुदा की देन है , इन्सान का मशहूर हो जाना

- नमालूम

उधर हम दुश्मनों

उधर हम दुश्मनों की घात से बच कर निकले
इधर देखा तो कुछ अहबाब भी खंजर संभाले बैठे हैं

- नमालूम

Friday, December 26, 2014

नारी ! तुम केवल श्रृद्धा हो

नारी ! तुम केवल श्रृद्धा हो विश्वास रजत नाग पगतल में
पीयूष स्रोत ही बहा करो जीवनके सुन्दर समतल में

- नमालूम

जिसके ह्रदय सदा समीप

जिसके ह्रदय सदा समीप हैं वही दूर जाता है
और क्रोध होता उस पर ही जिससे कुछ नाता है

- नमालूम

तेरी जुस्तुजू में हम ख़ुदा तक पहुँच गए

तेरी जुस्तुजू में हम ख़ुदा तक पहुँच गए
लेकिन तेरा पता न चला तेरे शहर में

- नमालूम

है रीत आशिकों की

है रीत आशिकों की तन-मन निसार करना
रोना सितम उठाना और उनको प्यार करना

- नमालूम

तू मुझे मार भी दे ऐ दोस्त !

तू मुझे मार भी दे ऐ दोस्त !
पर ये लहू के छींटे तेरे दामन को छू लेंगे

-नमालूम

ताकि दीदार-ए-यार हो सके

मेरी मय्यत को सनम की गली से ले जाना
ताकि दीदार-ए-यार हो सके

- नमालूम

ये मुमकिन न बना पाए

ये मुमकिन न बना पाए कोई ताजमहल
मगर हर दिल में मुमताज रहती है

- नमालूम

आलस भरी सुबहें

आलस भरी सुबहें , और उमस भरी शाम
कहो ख़त लिखूं , गीतों के नाम

- नमालूम

बरसात के बादल

आँखों में मेरी छाये हैं बरसात के बादल बादल की तरह क्या पीट के रोना जरूरी है

- नमालूम


फूलों की बरसात हुयी

फूलों की बरसात हुयी अंगनाई में
हार गले से टूट गए अंगड़ाई में

- नमालूम

कितनी अजीब बात है

कितनी अजीब बात है, इस दौर में भी लोग
हथियार दाल देते हैं , मुकद्दर के सामने

- नमालूम

उनको शायद ही पता हो

उनको शायद ही पता हो बेबसी क्या चीज है
हमने तो अब तक न जाना ज़िन्दगी क्या चीज है

- नमालूम

एक क़तरे की तलब

हम पपीहे हैं हमें है एक क़तरे की तलब
हम कहाँ ले जाएँ इस मसहर नुमा बरसात को

- नमालूम

उन मीठी-मीठी बातों में

यह यास का सन्नाटा तो न था , जब आस लगाये सुनते थे
माना कि था धोखा ही धोखा , उन मीठी-मीठी बातों में

- नमालूम

उनकी नज़र ने झुक के कहा

कुछ मेरी नज़र ने उठ के कहा , कुछ उनकी नज़र ने झुक के कहा
झगड़ा जो न बरसों में चुकता, टप हो गया बातों-बातों में

- नमालूम

बरसात की भीगी रातों में

बहला के सवेरा करते हैं इस दिल को उन्हीं की बातों में
दिल जलता है अपना जिनकी तरह बरसात की भीगी रातों में

- नमालूम

मुझे जी भर के रोने दो

क़सम ले लो जो शिकवा हो तुम्हारी बेवफाई का
किए को अपने रोता हूँ , मुझे जी भर के रोने दो

- नमालूम

दुनियाये उल्फत

यही दुनियाये उल्फत में , हुआ करता है होने दो
तुम्हें हँसना मुबारक हो , कोई रोता है रोने दो

- नमालूम

ताउम्र बियाबां मेरी ज़िन्दगी रही

ताउम्र बियाबां मेरी ज़िन्दगी रही
एक सख्त इम्तेहान मेरी ज़िन्दगी रही

- नमालूम

इसीलिए लोग ख़फा रहते हैं

इसीलिए लोग ख़फा रहते हैं मुझसे
मैं अपने दिल को जुबां पर रखता हूँ

- नमालूम

चाहे जितने भी

चाहे जितने भी सितारे क्यूँ न हों , इस चमन में
मेरे चाँद का जवाब नहीं

- नमालूम

तुम मुझे इस तरह

तुम मुझे इस तरह भुला न पाओगी
जब भी देखोगी आईने में खुद को
मेरी ही तस्वीर नज़र आएगी

- नमालूम

दिल से न निकलेगी

दिल से न निकलेगी , मरकर वतन की उल्फत
मेरी कब्र की मिट्टी से खुशबु-ए-वफ़ा आएगी

- नमालूम

मैं जाता हूँ

मैं जाता हूँ दिल को तेरे पास छोड़
मेरी याद तुझको दिलाता रहेगा

- नमालूम

Wednesday, December 24, 2014

दिल के आईने में है

दिल के आईने में है तस्वीर यार की
जरा गर्दन झुकाई कि देख ली

- नमालूम

ऐ हुजूमे ग़म !

ठेस न लग जाए उनको , हसरते दीदार को
ऐ हुजूमे ग़म ! सँभलने दे जरा बीमार को

- नमालूम

जब से सुना है

जब से सुना है कि मरने का नाम ज़िन्दगी है
सर पे कफ़न बाँध , कातिल को ढूंढते हैं

- नमालूम

फानूस को देखा

फानूस को देखा परवानों ने तो बोले
क्यों जलाते हो हमको , जलने क्यों नहीं देते

- नमालूम

जो तेरी याद में गुजर जाए

शब वही शब , दिन वही है दिन
जो तेरी याद में गुजर जाए

- नमालूम

आते-आते इधर यादें रह गयीं

मेरे घर की तरफ धूप की पीठ थी
आते-आते इधर यादें रह गयीं

- नमालूम

किसी कमजर्फ को

किसी कमजर्फ को बेदाद मारा तो क्या मारा
जो खुद ही मर रहा हो उसको मारा तो क्या मारा

- नमालूम

एक अब्र का टुकड़ा

एक अब्र का टुकड़ा कहाँ-कहाँ बरसे
सारा का सारा दस्ता प्यासा जान पड़ता है

- नमालूम

Thursday, December 18, 2014

मुश्किलें इतनी पड़ी

मुश्किलें इतनी पड़ी मुझ पर
कि आसां हो गयीं.

- नमालूम

ये कातिलनमा हमला तनहा में न कीजिये

ये कातिलनमा हमला तनहा में न कीजिये
यानी आँखों में आँख डाल मुस्कुराना बंद कीजिये

- नमालूम

यूँ आईने से लगे बैठे

यूँ आईने से लगे बैठे , खूब अपने को निहारा करते हैं
जो कभी मेरा ही अक्स इसमें भी नज़र आया तो क्या करेंगे

- नमालूम

बहुत दूर तक साथ ग़मों ने दिए

बहुत दूर तक साथ ग़मों ने दिए
जब मैं न थका तो खुद थक गए

- नमालूम

क़दम चूम लेती है मंजिल

क़दम चूम लेती है मंजिल खुद बढ़कर
अगर मुसाफिर हिम्मत न हारे

- नमालूम

लिखा जो दर्द किस्मत में

लिखा जो दर्द किस्मत में ख़ुदा को क्या याद करना
जहाँ बेदर्द हाकिम हो वहां फ़रियाद क्या करना

- नमालूम

खुली रहीं आँखें मेरी

खुली रहीं आँखें मेरी , मरने के बाद भी
भला इससे बड़ा इंतज़ार क्या होता

- नमालूम

बता मुझे ओ जहाँ के मालिक

बता मुझे ओ जहाँ के मालिक , क्या नज़ारे दिखा रहा है
तेरे पास क्या कमी है , जो मुझको रुला रहा है

- नमालूम

Wednesday, December 17, 2014

तुम्हें गैरों से कब फुर्सत

तुम्हें गैरों से कब फुर्सत , हम अपनों से कब खाली
चलो हो चुका मिलना अब, न हम खाली, न तुम खाली

- नमालूम


दरमियाँ बादलों के

दरमियाँ बादलों के बीच न जाने क्या साजिश हुयी
बारिश वहीँ हुयी जिसका घर मिटटी का था

- नमालूम

डाली पर

डाली पर , जिसने भी नज़र डाली, बुरी नज़र डाली
मैंने जिस डाली पे नज़र डाली उस डाली को माली ने काट डाला

- नमालूम

जिसने खायी कसम

जिसने खायी कसम ज़िन्दगी की ज़िन्दगी ने उसे मार डाला
झूमती ज़िन्दगी के गले में हार कर , हार ने, हार डाला

- नमालूम

Friday, December 5, 2014

सितारों के तारों की धुन

सितारों के तारों की धुन तो सबने सुनी है
साँसों पे क्या गुजरी है वो किस दिल को पता है

- नमालूम

अजब शहर का मंजर

अजब शहर का मंजर मुझे मिला
हाथों में फूल और फूल में खंजर निकला

- नमालूम

मैंने चाहा आपको

मैंने चाहा आपको और आपने चाहा किसी और को
ख़ुदा न करे कि जिसे आप चाहें , वो भी चाहे किसी और को

- नमालूम

मुझे तो अपनों ने लूटा

मुझे तो अपनों ने लूटा , गैरों में कहाँ दम है
मेरी कश्ती वहीँ डूबी, पानी जहाँ कम था

- नमालूम

तुम आ जाना मेरे पास

तुम आ जाना मेरे पास
मेरी ज़िन्दगी
मेरी ज़िन्दगी के साथ

- नमालूम

जेरे शमसीर मेरा सर है

जेरे शमसीर मेरा सर है झुकाऊं किसको
एक हमबार महशर है पुकारूं किसको
कोई दुश्मन हो तो मैं उसके मुक़ाबिल आऊँ
दोस्त के हाथ में खंजर है पुकारूँ किसको

- नमालूम

बंद दरवाजे पर

बंद दरवाजे पर
दस्तक दे रहे हो
क्या कभी
मिलना तुम्हारा
हो सकेगा ?

- नमालूम

ऐसी नहीं थी बात

ऐसी नहीं थी बात कि कद मेरे घट गए
चादर को अपनी देखकर हम खुद ही सिमट गए
जब हाथों में कलम था अल्फाज नहीं थे
अब लफ्ज मिल गए तो हाथ कट गए

- नमालूम

शीशे के बदन वालो

शीशे के बदन वालो
चुपके से निकल लो
कुछ लोग अँधेरे में पत्थर लिए बैठे हैं

- नमालूम

तू कातिल तेरी नज़र कातिल

तू कातिल तेरी नज़र कातिल
तेरे गाल पर काला टिल कातिल
ऐ हसीना आईने में न देख
कहीं मिल न जाए कातिल-कातिल

- नमालूम

उस चाँद से हमें कोई सरोकार नहीं

उस चाँद से हमें कोई सरोकार नहीं
जिसमें तेरे प्यार की रौशनी नहीं
राह दिखायेंगे हमें तो सिर्फ वही तारे
जो तेरी लौ-ए-मुहब्बत से चमकते हैं

- नमालूम

Thursday, December 4, 2014

होके मायूस न यों शाम से ढलते रहिये

होके मायूस न यों शाम से ढलते रहिये
ज़िन्दगी भोर है सूरज से निकलते रहिये
एक ही पाँव पे ठहरोगे तो थक जाओगे
धीरे,धीरे ही सही राह पर चलते रहिये

- नमालूम

Wednesday, December 3, 2014

इस शहर के लोगों के नक़्शे अधूरे हैं

इस शहर के लोगों के नक़्शे अधूरे हैं
हँसते हुए लोगों के रोते हुए चेहरे हैं
दिल के तराजू पर फैसला करे कोई
मेरी आँख भी नम है उसकी आँख भी नम है

- नमालूम


मैं यह जानता हूँ

मैं यह जानता हूँ कि यह हवा उड़ा ले जाना
जंगल की वीरानी में
इसीलिए मेरी दोस्ती सितारों से है

- नमालूम

तृप्ति जिस पर टिके

तृप्ति जिस पर टिके वह धुरी चाहिए
मन जहाँ राम सके वह पूरी चाहिए
द्वन्द सारे जगत के सिमट जायेंगे
एक सहज प्रेम की वांसुरी चाहिए

- नमालूम

रूप विम्ब केवल नमन के लिए

रूप विम्ब केवल नमन के लिए
शब्द के स्रोत केवल श्रवण के लिए
मन के लिए तो केवल तपन देह की
जैसे तपती है धरती गगन के लिए

- नमालूम

ज़िन्दगी प्यार का मधुमास है

ज़िन्दगी न तृप्ति है , न प्यास है ज़िन्दगी न आस है, न विश्वास है
ज़िन्दगी को जीकर देखिये
ज़िन्दगी प्यार का मधुमास है

- नमालूम

शुभकामना जो मिली तुम्हारी

शुभकामना जो मिली तुम्हारी
ह्रदय वीणा से झंकृत हुयी
मन हुआ आह्लादित
खिल गयी जैसे अधखिली कली

- नमालूम

स्वप्न के दायरे से निकल जायेंगे

स्वप्न के दायरे से निकल जायेंगे
आपकी ही तरह हम संभल जायेंगे
पतझड़ में सुमन के चलन की तरह
आप बदले हैं हम भी बदल जायेंगे

- नमालूम

जिनकी बाहों में जग के

जिनकी बाहों में जग के
काया कंचन हो जाती थी
आज उन्हीं के आगे हम
बुत हैं अपनी मजबूरी में
हमने अपना क्या-क्या खोया
चाहत की मशहूरी में

- नमालूम

कौन मिलता है बेसहारों से

दिल ये नासूर बनके उभरी है
चोट खायी है जो भी चारों से
कौन होता है किसके ग़म में शरीक
कौन मिलता है बेसहारों से

- नमालूम

इक तेरी जुदाई

इक तेरी जुदाई में ये बात नज़र आई
चुभने लगे सन्नाटे डसने लगी तन्हाई
हमने सलीके से जख्मों को छुपाया था
ज़िक्र हुआ उसका तो फिर चोट उभर आई

- नमालूम

राह दर राह

राह दर राह गुबारों में भटकने वाले
तू भी इस बार किसी राह की मंजिल हो जा
मांगने से तो यहाँ मिलती न चीज कोई
अपने हक़ के लिए दुनिया के मुकाबिल हो जा

- नमालूम

चलो अच्छा हुआ

चलो अच्छा हुआ अपने में से कोई बेगाना तो निकला
गर सभी अपने होते तो बेगाने कहाँ जाते
दुनिया ही चमन होती तो बीराने कहाँ जाते

- नमालूम

मसर्रत पे रिवाजों का सख्त पहरा है

मसर्रत पे रिवाजों का सख्त पहरा है
न जाने किस उम्मीद पे ये दिल ठहरा है
मेरी आँखों में छलकते हुए इस ग़म की कसम
ऐ दोस्त दिल का रिश्ता बहुत ही गहरा है

- नमालूम

चित्र खींचती थी

चित्र खींचती थी जब चपला
नील मेघ पट पर वह विरला
मेरी जीवन स्मृति के जिसमें
खिल उठते वे रूप मधुर थे
वे कुछ दिन कितने सुन्दर थे

- नमालूम

तेरी इक झलक की

तेरी इक झलक की बीमार आँखें
तेर अचहती हैं दीदार आँखें
जो देख लें तुझे इक बार आँखें
हो जाएँ अच्छी बीमार आँखें

- नमालूम

Monday, December 1, 2014

पाए हैं मान पत्र

चले हैं राह में तो कंकड़ भी मिलेंगे
पाए हैं मान पत्र तो पत्थर भी मिलेंगे
चले थे कागज़ के तोप लेकर ,पर
क्या बारूद के दफ्तर भी मिलेंगे

- नमालूम

तमन्ना न हुयी पूरी

अपनों ने मुझको लूट के पागल बना दिया ग़मे ज़िन्दगी ने मुझको घायल बना दिया
कुछ बनाना चाहा भी मैंने , तमन्ना न हुयी पूरी
मेरी ज़िन्दगी के जन्मदाता ये तूने क्या किया

- नमालूम


ऐ ख़त उनकी जुल्फों को शाम कहना

ऐ ख़त उनकी जुल्फों को शाम कहना
उनकी आँखों को जाम कहना
जब सामने आये आईने के तो
उनको मेरा सलाम कहना

- नमालूम

तुम अपने सुख से सुखी रहो

तुम अपने सुख से सुखी रहो , मुझको दुःख पाने दो स्वतंत्र
मन की परवशता महादुःख मैं यही जपूंगा महामंत्र
लो चला आज मैं छोड़ यही संचित संवेदन भार पुंज
मुझको कांटे ही मिले धन्य ! हो सफल तुम्हें ही कुसुम कुञ्ज

- नमालूम

तेरे सुख को मात्र

तेरे सुख को मात्र मैं सौभाग्य मानूँ
तेरे हर दुःख को दुर्भाग्य मानूँ
और जब भी आ पड़े तेरे लिए तो
अपना सब बलिदान कर उपकार मानूँ

- नमालूम